Wednesday, 17 June 2020

गमलों में पौधे लगाने की पूरी जानकारी



पौधे के लिए गमले 

गमले मे पौधा लगाने के लिए हम घर मे उपयोग न होने वाले पुराने बर्तन,प्लास्टिक के टप,बाल्टी, घर मे खाली पड़ी प्लास्टिक की बोतलें आदि का उपयोग गमले के रूप मे कर सकते है। ज्यादातर लोग सीमेंट,और प्लास्टिक के गमलों का उपयोग कर रहे है। क्योंकि यह गमले मिट्टी के गमले की अपेक्षा अधिक मजबूत होते है। और इनसे गंदगी भी नही फैलती है। छत पर पौधे लगाते समय आप HDPE ग्रो बैग का उपयोग करें । यह ग्रो बैग वजन में हल्के और यू वी कोटेड होते है जो कि धूप से खराब नही होते।
 



पौधे  के लिए मिट्टी की तैयारी --

 गमले मे पौधे लगाने के लिए उपजाऊ मिट्टी की आवश्यकता पड़ती है अगर मिट्टी उपजाऊ नहीं है।  तो उसमे गोबर की खाद उचित मात्र मे मिलाकर गमले मे भर दे ।  गमले मे पौधे को बीचों बीच मे लगाना चाहिए। गमले को ऊपर से दो या तीन इंच खाली रखे जिससे पानी बहकर बाहर न निकले। गमलों के लिये आप अपने बगीचे की नाॅर्मल मिट्टी में खाद मिलाकर तैयार कर सकते हैं।छत पर बागवानी करने के लिये आप Cocopeat का प्रयोग करें यह नारियल के छिलके बनी बहुत हल्की मीडिया है। 




गमले मे खाद डालना 

गमले के लिए गोबर की खाद या सड़े गले कूड़ा करकट से बनी खाद ही सबसे अच्छी होती है । नीम ,सरसों ,मूंगफली की खली का प्रयोग हम खाद के रूप मे कर सकते है। गमले मे लगभग 15 से 20 दिन मे हल्की हल्की निराई गुड़ाई करते रहे जिससे मिट्टी मे नमी बनी रहे। और पौधों की जड़ों तक पानी आसानी से पहुँच सके । महीने में दो बार से ज्यादा कोई खाद ना दें। अच्छे तरीके से डीकम्पोस्ड हो चुकी खाद ही पौधों में प्रयोग रें।



गमले मे समय समय पर  पानी देना 

गमले मे लगे पौधे को आवश्यकतानुसार समय समय पर पानी देते रहे। सर्दी के मॉसम मे 24 घंटे मे एक बार और गर्मी के मौसम मे दो बार पानी दे। ज्यादा से ज्यादा पौधे को  पानी शाम के समय ही दे। गमले को बच्चों की पहुँच  से दूर रखे । गमले को किसी खिड़की,रोशनदान या बालकनी के पास रखे जिससे हल्की हल्की धूप गमले पर पड़ती रहे क्योंकी हल्की धूप पौधों के लिए बहुत ही आवश्यक होती है।

    

गमले मे फूल और सजावटी पौधे लगाना 

गमले मे हम अनेक प्रकार के पौधे लगा सकते है। इनमे पाम, साइकस पाम,गेदा , गुलाब,मोगरा आदि फूलों की ढेर सारी बैरायटी के पौधों लगा सकते है। इन पौधों को मौसम के हिसाब से लगा सकते है। 



 बारह मासी पौधे ---  बेगन बोलिया ,रात की रानी ,गेदा ,चमेली ,मोगरा,मोरपंख ,आदि पौधे लगा सकते है।

सर्दी मे लगने  वाले पौधे -- गुलाब, कॉर्न फ्लॉवर ,कारनेशन ,डाहेलिया ,गेदा आदि । 
     
गर्मी मे लगने वाले पौधे --- सूरजमुखी ,कॉसमौस ,जीनीया ,आदि पौधे लगा सकते है।  



गमले मे खरपतवारो का उगना 

गमले में पौधो के साथ-साथ अनेक प्रकार के खरपतवारो  का उगना जायज है। इन खरपतवारो को  हाथ से उखाड़ कर फेक देना चाहिए।  इसके नियंत्रण के लिए रासायनिक पदार्थ के घोल का छिड़काव  करना चाहिए। 

आप हमारा यह वीडियो देखकर घर पर खाद बनाना सीख सकते हैं





पौधों मे  कीट एवं रोग  नियंत्रण

-[1]  तना बेधक कीट --इस कीट  की सूड़ी रात मे निकलती है जो कोमल तनों को जमीन की सतह से काट देती है। इस कीट की रोकथाम के लिए हेप्टाक्लोर 5 प्रतिशत के धूल को पौधे लगाने से पहले मिट्टी मे अच्छी तरह से मिला दे।

[2] माहू कीट -- ये अत्यंत छोटे -छोटे हरे रंग के कीट होते है। इनके शिशु तथा प्रौढ़ पौधे के कोमल भागों से रस चूसते है। इन कीटों की संख्या बहुत तेजी से बढ़ती है,पत्तियां पीली पड़ जाती है। यह कीट विषाणु के फैलाने का कार्य करती है। इस कीट का प्रकोप उस समय अधिक होता है जब तापक्रम सामान्य से कम और अद्रता अधिक हो ।   
 रोकथाम ---- इस कीट के नियंत्रण के लिए साइपर मेथन के  0.15 प्रतिशत घोल का छिड़काव करना चाहिए।  

मोजेक रोग --यह रोग विषाणु द्वारा फैलता  है। जो कीटों द्वारा रोगी पौधे से स्वस्थ पौधे पर पहुंचते है। इस रोग से प्रभावित पौधे की पंक्तियाँ पीली पड़कर सूख जाती है।

रोकथाम - रोगी पौधों को उखाड़कर जला दे या मिट्टी मे दवा दे । कीटों  को मारने के लिए 0.2 प्रतिशत मेलथियानं के घोल के 10 से 15 दिन के अंतर पर 2 से 3 छिड़काव करें।



पत्तियों के धब्बे -- यह रोग फफूंद के कारण होता है। इसके कारण पत्तियों पर अनेक भूरे धब्बे बन जाते है। ये धब्बे पत्तियों पर अनेक प्रकार से मिलकर काफी जगह घेर लेते है। जिससे पत्तियां सूख कर गिर जाती है।

रोकथाम -

[1]-ब्लाईटोक्स के 0.2 प्रतिशत घोल का छिड़काव 7 से 8 दिन के अंतराल पर करना चाहिए।
[2]-रोग रोधी पौधों को उखाड़कर दूर फेक देना चाहिए। 

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