Wednesday, 10 June 2020

पपीता की खेती की जानकारी



पपीता फलों में प्रमुख स्थान रखता है यह बहुत ही उपयोगी फल हैं ।पपीता लगभग एक वर्ष बाद ही फल देने लगता है। पपीते से  3 वर्ष तक व्यवसायिक फसल  के रूप से उत्पादन ले सकते हैं। पपीता को  गृह वाटिका में भी उगाया जा सकता है। इसके फलों का प्रयोग सब्जी ,आचार जैम बनाने तथा मुरब्बा आदि के रूप में प्रयोग किया जाता है | आजकल पपीता की खेती काफी फायदे का सौदा है |अगर वैज्ञानिक विधि से पपीता की खेती की जाए तो किसान काफी फायदा के सकते है।


आहार मूल्य----पपीता एक पौष्टिक फल है जिसमें विटामिंस तथा खनिज पदार्थ प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। यह विटामिन ए का प्रमुख स्रोत है पेट के रोगों के लिए यह बहुत ही लाभदायक फल ।

पपीता की खेती कब करें? 

यों तो पपीता गरम और आद्र जलवायु का पौधा है। जहां अच्छी गर्मी और बारिश होती है वहां पर पपीते की फसल आसानी से उगाई जा सकती है।

जलवायु---पपीता उस जलवायु का पौधा है जिसे होश में जलवायु में भी उन क्षेत्रों में उगाया जा सकता है जहां पहले का प्रभाव कम होता है। सफल उत्पादन के लिए खुली धूप तथा सिंचाई के प्रबंध होनी चाहिए। इसकी कुछ ऐसी किस्म है जो अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों एवं पहाड़ पर 1500 से 2100 मीटर की ऊंचाई पर भी पैदा की जाती है ।

उत्तर भारत मे फरवरी  और सितंबर माह  पपीता लगाए जाने के लिए सबसे उपयुक्त समय है इस समय पपीता के लिय जरूरी तापमान ओर अद्रता मिल जाती है |

पपीता की खेती से फायदा - 
 एक एकड़ खेत में 1300- 1500 पपीता के पौधे लगाए जा सकते है। एक साल में पपीते के एक पौधे से 30_50 किलो फल मिल जाता है। बाजार मूल्य की बात की जाए तो सात रू से लेकर पंद्रह रू तक इसका भाव मिल जाता है। इस तरीके से 40×12 = 480 एक पौधे से लाभ । 1500× 480 = 7,2000 होगा। इसमें से आप दो लाख रु लागत के निकाल दीजिए तो आपको पांच लाख रु के आसपास मुनाफा हो जाएगा। किसी भी फसल का मुनाफा किसान की खेती करने के तरीके ,मौसम तथा बाजार में मिलने वाले भाव पर भी निर्भर करता है। कुल मिलाकर अगर आप सही तरीके से पपीता की खेती करेगे तो आपको अच्छा लाभ होगा।



भूमि----पपीता के लिए गहरे उर्वर भूमि उपयुक्त होती है। मध्यम काली या जलोढ़ मिट्टी भी इसके लिए उपयुक्त पाई गई है। जल प्लावन से प्रभावित मिट्टी पपीता के लिए उपयुक्त नहीं होती।

घर पर गमले में पपीता कैसे लगाए?
अगर आप पपीता को घर पर गमले में पपीता उगाना चाहते है तो इसके लिए आपको एक बड़ा गमला या टब प्रयोग करना पड़ेगा। क्योंकि पपीता से अच्छे फल लेने के लिए पौधे का सही होना बहुत जरूरी है । आप बड़ा से ड्रम भी पपीता उगाने के लिए प्रयोग कर सकते है।
बीज - घर पर गमले में 
पपीता उगाने के लिए हाइब्रिड किस्म का पपीता बीज प्रयोग करें। जैसे पुसा नन्हा, पुसा ड्राफ्ट, या फिर ताइवान रेड लडी

उन्नत किस्में और उनकी विशेषताएं---


हाइब्रिड पपीता की खेती . 

अगर आप पपीता की फसल से अधिक उत्पादन लेना चाहते है तो आपको पपीता की हाइब्रिड किस्म लगानी होगी ,नीचे पपीता की कुछ हाइब्रिड किस्मों की जानकारी दी गई है |


पूसा नन्हा----:: पपीता की यह किस्म नई दिल्ली द्वारा विकसित की गई है यह अधिक उपज देने वाली बौनी किस्म है जिसकी कुल ऊंचाई 106 सेमी से कम होती है यह किस्म घर के लिए उपयुक्त है।

पूसा डेलीशस---यह एक गाइनोडायोसियस किस्म है जिसके फल मध्यम आकार के होते हैं इसमें भूमि तल से 40 से 50 सैनी की ऊंचाई पहल लगते हैं । ऐसे किस्म की भंडारण क्षमता अच्छी पाई जाती है।


पंत पपीता---- इस किस्म के पौधे बौने होतेे हैं। एक पौधे मैं 30- 40 फल लगते हैं। एक फल का औसत भार 2 किलोग्राम होता है। फल खानेे मैं स्वादिष्ट और  इनकी उपज अच्छी होती है।

कोयम्बटूर-1-------::इस किस्म के पौधे बौने फल मध्यम आकार के धारीदार गोल और पकने पर पीले हो जाते हैं। फलों का गूदा पीला और रसदार मीठा होता है। ऐसे पौधों में 60 सेमी ऊंचाई से फल आने प्रारंभ हो जाते हैं।





                   पपीता लगाने की विधि

रोपण----अच्छी तरह से तैयार खेत में 2 मीटर की दूरी पता 50 50 सेंटीमीटर आकार के गड्ढे मई के महीने में  खोदकर 15 दिन के लिए खुला छोड़ देते हैं ताकि गड्ढों में अच्छी तरह से धूप लग जाए गधों की आधी मिट्टी एवं आदि सड़ी हुई गोबर की खाद और फोरेट को मिलाकर इस प्रकार भरना चाहिए कि गड्ढा जमीन से 10 से 15 सेमी ऊंचा रहे गड्ढों की भराई के बाद सिंचाई कर देनी चाहिए जिससे मिट्टी अच्छी तरह से बैठ जाए।

बीज से नर्सरी कब बनाए ?
जनवरी के आखिरी सप्ताह से फरवरी के मध्य सप्ताह तक पपीते के बीज लगा दे। 15_30 दिन में पपीते के पौधे खेत में लगाए जाने के लिए तैयार हो जाते है। सितम्बर में पपीते लगाने के लिए आप अगस्त महीने के शुरू में ही पपीते के बीज लगा दें जिससे सितम्बर महीने के शुरुआत में ही आप पपीते के पौधे अपने खेत या घर पर लगा सकें


खाद तथा उर्वरक-----पपीते की अधिक उपज लेने के लिए प्रति पेड प्रतिवर्ष 20-25 किलोग्राम गोबर की सड़ी हुई खाद तथा 250 ग्राम नाइट्रोजन 250 ग्राम फॉस्फोरस 500 ग्राम पोटास  को 2 महीने के अंतराल पर लगभग 6 बार देनी चाहिए।



सिंचाई---

पपीते को सर्दियों में 10 से 12 दिन तथा गर्मियों में 6 से 8 दिन के अंतर से सिंचाई करनी चाहिए। वर्षा ऋतु मैं जब वर्षा ठीक प्रकार से नहीं होती है तो 1-2 सिंचाई कर देनी चाहिए। पौधों से अच्छी पैदावार लेने के लिए नियमित रुप से सिंचाई करते रहे।पपीते में ड्रीप से सिंचाई करने से अधिक लाभ मिलता है और पैसा भी कम खर्च होता है।


निराई - गुडाई-----पपीते की बागवानी में खरपतवार नियंत्रण के लिए तीन से चार बार निराई-गुडाई करनी चाहिए ।निराई-गुडाई के दौरान पौधे की चारों तरफ मिट्टी को चढ़ा देनी चाहिए। जिससे तेज हवा से पौधे गिर न जाये।


 कीट नियंत्रण

रेड स्पाइडर माइट-----इस कीट का प्रकोप पत्तियों व फलों पर होता है यह कीट पत्तियों से रस चूसता है जिससे पत्तियां पीली पड़ जाती हैं।
इस कीट के नियंत्रण के लिए मेलाथियान 50ई• सी के 0.1 प्रतिशत घोल का छिड़काव करें।


माहू-------ऐसे कीट के शिशु पौधों से रस चूसते हैं और पौधों को हानि पहुंचाते हैं तथा विषाणु रोग फैलाने में मदद करते हैं।
इसकी रोकथाम के लिए डायमेथोएट 30 ई•सी को 1.5 मिली प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिए ।


रोग नियंत्रण--

पदलगल--------यह बीमारी पिथकयम नामक फफूंदी से होती है इस रोग का प्रकोप नर्सरी में होने पर पौधे जमीन की सतह से मुड़ कर गिर जाते हैं पत्तियां पीली पड़ जाती हैं तथा पौधे सड़क नीचे गिर जाते हैं।
रोकथाम
(1) नर्सरी में बीज बोलने से पहले बीज को  कैप्टन कवकनाशी रसायन से उपचारित करने के बाद बोये।
(2) नर्सरी की मिट्टी को उपचारित कर लें।

कोलार रोट ----यह रोग फफूंद के द्वारा होता है इस रोग से प्रभावित पौधे के तने जो जमीन की सत्य के पास होता है वह भाव सड़ जाता है तथा उसी समय पत्तियां सूख जाती हैं। जलमग्न की दशा में यह रोग तेजी से बढ़ता है।

रोकथाम-----ताम्र युक्त कवक नाशक के 0.3 प्रतिशत घोल से तने के चारों तरफ भूमि को अच्छी प्रकार सीच दे 


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