Monday, 6 July 2020

इलायची की खेती

इलायची की खेती
इलायची उत्पादक देश में भारत का नाम पहले नंबर पर आता है ।भारत में इलायची का उत्पादन केरल तमिलनाडु और कर्नाटक में सबसे ज्यादा किया जाता है। इलायची का पौधा पूरे साल हरा भरा रहता है ।इसकी पत्तियां एक या 2 फीट लंबाई की होती हैं। इलायची का इस्तेमाल मुख शुद्धि और मसाले के रूप में किया जाता है ।इसकी खुशबू की वजह से इसका इस्तेमाल मिठाइयों में भी किया जाता है।


उपयुक्त मिट्टी--- इलायची की खेती के लिए मुख्य रूप से लाल दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त होती है ।इसके अलावा उचित देखरेख और भी कई तरह की मिट्टी में इसकी खेती की जा सकती है ।इलायची की खेती के लिए मिट्टी का Ph मान 5 से 7 . 5 के बीच होना चाहिए।


इलायची के पौधे के लिए उपयुक्त जलवायु और तापमान---
इलायची की खेती के लिए उष्ण कटिबंधीय  जलवायु उपयुक्त होती है ।इलायची की खेती समुद्र तल से 600 से 1500 की ऊंचाई वाले स्थानों पर की जा सकती है इसकी खेती के लिए 1500 मी0 बारिश हवा में नमी और छायादार जगह का होना जरूरी है।

इलायची की उन्नत किस्में ----- इलायची की दो प्रजातियां पाई जाती हैं जिन्हें छोटी या बड़ी इलायची और हरी व काली इलायची के नाम से जाना जाता है।

(1) हरी इलायची----- हरी इलायची को छोटी इलायची भी कहते हैं। इसका उपयोग खाने में मुख शुद्धि, औषधि मिठाई और पूजा पाठ में किया जाता है इसके पौधे 10 से 12 साल तक पैदावार देते हैं।

(2) काली इलायची----- काली इलायची को बड़ी इलायची भी कहते हैं। बड़ी इलायची का इस्तेमाल मसाले के रूप में किया जाता है ।इसका आकार छोटी इलायची से काफी बड़ा होता है। इसका रंग हल्का लाल काला होता है ।काली इलायची में कपूर जैसी खुशबू आती है।

खेत की जुताई----  पहली जुताई मिट्टी पलट हल से करके तीन से चार जुदाईयां देसी हल या कल्टीवेटर से करके मिट्टी भुरभुरी तथा डेले रहित बना लेनी चाहिए।


इलायची की खेती की सिंचाई---- इलायची की खेती के लिए सिंचाई की अति आवश्यकता होती है। खेत की सिंचाई मौसम के हिसाब से करनी चाहिए ।गर्मी के मौसम में 5 से 6 दिन बाद एक सिंचाई करनी चाहिए ।जबकि सर्दी के मौसम में लगभग 12 से 15 दिन बाद सिंचाई करनी चहिए ।खेत में जल निकास का उचित प्रबंध होना चाहिए ।जिससे बरसात का फालतू पानी खेत से बाहर निकाला जा सके।

इलायची के औषधि गुण----। आयुर्वेदिक  चिकित्सको के अनुसार इलायची के इस्तेमाल से स्वास, खांसी ,बवासीर, क्षय, पथरी आदि रोगों में किया जाता है ।

गले में खराश---- यदि आवाज बैठी हुई हो या गले में खराश है तो सुबह उठते समय पानी पिए और रात को सोते समय इलायची चबाकर खाएं तथा गुनगुना पानी पिए ।

गले में सूजन---- यदि गले में सूजन है तो मूली के पानी में छोटी इलायची का सेवन करने से गले में होने वाले रोगो से छुटकारा पाया जा सकता है ।


बीज कहां से खरीदें---- इलायची की खेती के लिए सबसे उपयुक्त बीज का ही चुनाव करें ।यह बीज किसी दुकान या संस्थान से खरीदा जा सकता है। बीज हमेशा अच्छी क्वालिटी के होने चाहिए। घटिया किस्म के बीज से किसान  पैदावार में ज्यादा मुनाफा नहीं ले पाते हैं ।और पैदावार भी कम होती है।

पौध तैयार करना-----  इलायची की खेती के लिए प्रारंभ में नर्सरी में पौधे तैयार किए जाते हैं । पौधों को तैयार करने के लिए नर्सरी से 10 सेंटीमीटर की दूरी पर पौधों को लगाना चाहिए। बीजों को खेत में बोने से पहले ट्राइकोडर्मा नामक रसायन से उपचारित कर लेना चाहिए। एक हेक्टेयर खेत के लिए एक से सवा किलो बीज की आवश्यकता होती है।


इलायची के पौधे के लिए खाद------- इलायची के पौधे के लिए गोबर खाद सबसे अच्छी होती है। कंपोस्ट खाद या ऑर्गेनिक खाद से उगाया गया पौधा काफी अच्छा और मजबूत होता है ।इसके कारण पौधे से हमें जो भी फल प्राप्त होते हैं वह पूर्ण रुप से स्वादिष्ट और सुंदर होते हैं। इसके अलावा किचन से निकले खाद्य पदार्थ के छिलके ,नीम की खली आदि का उपयोग खाद के रूप में कर सकते हैं।

फसल की कटाई और सफाई-----    इलायची के पौधे की कटाई उसकी पूरी तरह से पकने से पहले कर लेनी चाहिए। बीजू पौधों की कटाई के बाद उसकी सफाई की जाती है। उसके बाद इसके बीज  के कैप्सूल को 8 से 12 सेंटीग्रेड तापक्रम पर सुखाकर तैयार किया जाता है। इसके बीजों को धूप में सुखाकर और पारस्परिक तरीके से तैयार किए जाते हैं।

इलायची सुखाने की विधि
(1)  धूप में सुखाना----  इलायची को धूप में सुखाने से बेहतर होगा कि आप पैदावार होने के बाद इसको प्राकृतिक रूप से  सूखने दें लगभग 3 से 4 दिनों में आप इसको सुखा सकते हैं।

(2)  भट्टी बनाकर सुखाना-----  आप चाहे तो इसको सुखाने के लिए किसी एक कमरे का चुनाव कर सकते हैं बाद में इसमें तापमान को बढ़ाकर कमरे को बंद करके रखें भट्टी में कोयला या लकड़ी को जलाकर रखें इस विधि को अपनाकर आप चाहें तो इसे सुखा सकते हैं।

इलायची में लगने वाले कीट
  कैटरपिलर----- यह किट पौधे की पत्तियों को खाकर नष्ट कर देते हैं।
● शूट बोरर----- यह कीट पौधे की तनी में घुसकर उसे अंदर से खोखला कर देता है जिसके कारण पौधे सूखकर नष्ट हो जाते हैं।

शूट फ्लाई---- यह पौधे के तने में घुसकर छोटे-छोटे छेद बना देते हैं । जिससे तना पूरी तरह खराब हो जाता है । इसके अलावा थ्रिप्स और एकिड नामक कीट पौधे को काफी नुकसान पहुंचाते हैं।
रोकथाम----  इस कीट की रोकथाम के लिए 1 किलो वैशालीन के अवयव को 1000 लीटर पानी में घोल बनाकर पौधे पर छिड़काव करने से इन कीटों से छुटकारा पाया जा सकता है।

0 comments:

Post a comment